Friday, 4 May 2012

गंगा की सफाई

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वर्षो से भारतीय इतिहास का हिस्सा बनी है गंगा 
पापियों के पाप धोकर उनके मन को किया है चंगा 
सतयुग,त्रेता,व्दापर  बीते इसके घाट पर 
कलियुग को भी शरण मिली ढोंगियों के नाम पर 
तीनो युग के लोगो ने किया इसमें पूर्वजो का दाह संस्कार 
निभाई अपनी परम्परा पर इसकी पवित्रता न होने दी बेकार 
अब हुई है कलियुग की शुरुआत 
वक़्त ने दी है इसको कई सौगात 
वास्तव में अब ये पापनाशिनी कहलाती थी 
इसकी पवित्रता की कसम खायी जाती थी 
बुद्धिजीवी इस रहस्य का पता लगाते थे 
इसके पवित्र जल में औषधि के गुण गाते थे 
जहाँ से ये बहती हुई निकल जाती थी 
वहां पर ये अन्न धन के खजाने लुटाती थी 
भारतीयों के विश्वास की कोई सीमा नहीं 
देवियों के इसके समान पवित्र कोई दूजा नहीं 
सतयुग,त्रेता,व्दापर के पापों को धो डाला 
कलियुग के पाप ने इसका ही रंग काला कर डाला 
अब तो इसमें अपनी सफाई के लिए नाले खुलने लगे 
लोभी,स्वार्थी,नेता लोग अपनी चालें चलने  लगे 
हम करेंगे गंगा की सफाई अभियान सफल 
हम तो अपना भला करेंगे चाहे यह प्रयास हो विफल 
पहले तो था केवल कर्मो तक फैला 
किन्तु आज मन विचारों को कर रहा मैला 
कर्मो की गंदगी तो गंगा ने धो ली
किन्तु मन की गंदगी से ये भी मैली हो ली 
अगर इसमें शुद्धता बनाये रखना चाहते हो 
तो फिर क्यों नहीं इसमें नाले खुलने पर पाबन्दी लगाते हो 
ये तो है हमारे आस्था का प्रतीक 
इससे तो जुड़ा है हमारा अतीत 
इसके बिना तो हमारा पवित्र कार्य भी अधूरा
इसकी स्वच्छता के लिए साथ दो मन से पूरा 
इसमें लालच स्वार्थ की गंदगी न मिलाओ 
साधारण पानी से बदत्तर इसकी हालत न बनाओ 

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